क्या हैं अयोध्या का राम मंदिर की वास्तुकला शैली?

अयोध्या का राम मंदिर वास्तुकला की नगाड़ा शैली में बनाया गया है| अयोध्या में भव्य राम मंदिर में अब पांच गुंबददार ‘मंडप’ और ‘शिखर’ होंगे। यह वास्तु शास्त्र के आधार पर मंदिर को 3 फीट के साथ 161 फीट ऊंचा बना देगा।

मंदिर को परियोजना के वास्तुकारों के अनुसार तैयार होने में लगभग तीन से 3.5 साल लगेंगे। मंदिर के डिजाइन पर 1990 से काम किया गया था।

क्या हैं अयोध्या का राम मंदिर की वास्तुकला शैली?

उत्तर भारतीय मंदिरों को आमतौर पर नगाड़ा शैली की वास्तुकला में बनाया गया था। वास्तुकला की इस शैली की विशेषता इसके विशिष्ट शिखर, एक अधिरचना, टॉवर और एक अभयारण्य से है, जो मंदिर का मुख्य भाग है और इसे विमना के रूप में भी जाना जाता है। … नागर शैली के अनुसार, मंदिर की संरचना में दो मुख्य भवन होते हैं।

नागर शैली का क्षेत्र उत्तर भारत में नर्मदा नदी के उत्तरी क्षेत्र तक है। परंतु यह कहीं-कहीं अपनी सीमाओं से आगे भी विस्तारित हो गयी है। नागर शैली के मंदिरों में योजना तथा ऊॅंचाई को मापदंड रखा गया है। नागर वास्तुकला में वर्गाकार योजना के आरंभ होते ही दोनों कोनों पर कुछ उभरा हुआ भाग प्रकट हो जाता है जिसे ‘अस्त’ कहते हैं। इसमें चांड़ी समतल छत से उठती हुई शिखा की प्रधानता पाई जाती है।

यह शिखा कला उत्तर भारत में सातवीं शताब्दी के पश्चात् विकसित हुई अर्थात परमार शासकों ने वास्तुकला के क्षेत्र में नागर शैली को प्रधानता देते हुए इस क्षेत्र में नागर शैली के मंदिर बनवाये।

इस शैली के मंदिर मुख्यतः मध्य भारत में पाए जाते है जैसे –

  1. कंदरिया महादेव मंदिर (खजुराहो)
  2. लिंगराज मंदिर – भुवनेश्वर (ओड़िसा )
  3. जगन्नाथ मंदिर – पुरी (ओड़िसा )
  4. कोणार्क का सूर्य मंदिर – कोणार्क (ओड़िसा )
  5. मुक्तेश्वर मंदिर – (ओड़िसा )
  6. खजुराहो के मंदिर – मध्य प्रदेश
  7. दिलवाडा के मंदिर – आबू पर्वत (राजस्थान )
  8. सोमनाथ मंदिर – सोमनाथ (गुजरात)

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